राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर मामला सामने आया है। पेनिशिया डिसएबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट्स के संस्थापक, अर्थ डायग्नोस्टिक सेंटर, उदयपुर के सीईओ एवं तीन बार के वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. अरविंदर सिंह द्वारा दायर आरटीआई में परिवहन निगम का जवाब बेहद असंवेदनशील पाया गया।
डॉ. सिंह ने बस स्टैंड और बसों में दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर, रैंप, सुगम शौचालय, हेल्पलाइन और अन्य सुविधाओं की जानकारी मांगी थी। जांच में सामने आया कि अधिकांश स्थानों पर ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
आरटीआई के जवाब में अधिकारियों ने इन सवालों को “अनावश्यक” बताते हुए कहा कि दिव्यांग अधिकारों पर बात करना “समय की बर्बादी” है। साथ ही यह भी कहा गया कि ऐसी मांगें प्रशासनिक कार्य में बाधा डालती हैं।
यह रवैया न केवल सूचना के अधिकार कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है, जो दिव्यांगों को समान अधिकार और सुविधाएं सुनिश्चित करता है।
पेनिशिया संस्थान ने मांग की है कि सभी बस स्टैंड और बसों को दिव्यांगों के लिए सुगम बनाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
👉 दिव्यांगों के अधिकार कोई दया नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार हैं।
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