Panacea Disability Rights Activists
"Where Disability Meets Justice"
Panacea Disability Rights Activists –
"Where Disability Meets Justice"

दिव्यांगजनों की सुविधाओं को लेकर उठाए गए सवालों पर राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) उदयपुर डिपो ने चौंकाने वाला जवाब दिया है। उदयपुर रोडवेज RTI दिव्यांग सुविधाएं से जुड़े 11 आवेदनों पर विभाग ने जानकारी देने से इनकार करते हुए इसे “अव्यावहारिक” और “प्रशासन के कार्य में बाधा” बताया।

RTI के जरिए उठाया गया मुद्दा

उदयपुर के सामाजिक कार्यकर्ता और पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट के अध्यक्ष डॉ. अरविंदर सिंह, अर्थ डायग्नोस्टिक सेंटर, उदयपुर के सीईओ एवं तीन बार के वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर, ने दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए एक-एक कर 11 RTI आवेदन लगाए।

डॉ. सिंह स्वयं दिव्यांग हैं और उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में आने वाली समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से अनुभव किया है। इसी कारण उन्होंने यह पहल की।

किन सुविधाओं पर मांगी गई जानकारी?

RTI आवेदन में निम्न महत्वपूर्ण सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी गई थी:

  • बसों में व्हीलचेयर रैंप
  • गेट के पास लो-लेवल हैंडल
  • सुगम (Accessible) शौचालय
  • हेल्पलाइन सुविधा
  • अलग कतार (Priority access)
  • प्रशिक्षित स्टाफ


डॉ. सिंह के अनुसार, इन सुविधाओं का अधिकांश स्थानों पर अभाव है, जिससे दिव्यांगजनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

रोडवेज का जवाब बना विवाद

उदयपुर रोडवेज के लोक सूचना अधिकारी ने सभी 11 RTI आवेदनों को एक साथ जोड़ते हुए जवाब दिया। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया कि इस प्रकार की सूचनाएं “अव्यावहारिक” हैं और प्रशासन के काम में बाधा डालती हैं।

इस आधार पर जानकारी देने से मना कर दिया गया।

अधिकार या उपेक्षा?

इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अरविंदर सिंह ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह रवैया न केवल RTI कानून की भावना के खिलाफ है, बल्कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की भी अनदेखी करता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा:
“दिव्यांगों के अधिकार कोई दया नहीं, यह उनका संवैधानिक हक है।”

पेनेशिया संस्था की मांग

पेनेशिया डिसेबिलिटी राइट्स एक्टिविस्ट संस्था ने प्रशासन से निम्न मांगें रखी हैं:

  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का पूर्ण पालन
  • सभी बस स्टैंड और बसों को सुगम बनाना
  • जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
  • दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना

निष्कर्ष

यह मामला केवल RTI का नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के अधिकारों और सम्मान का है।
उदयपुर रोडवेज RTI दिव्यांग सुविधाएं से जुड़ा यह मुद्दा यह दर्शाता है कि अभी भी सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह समावेशी बनाने की दिशा में काफी काम बाकी है।
जब तक सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से inclusive नहीं बनता, तब तक समानता का दावा अधूरा रहेगा।

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Lakecity Update

लेकसिटी अपडेट में उदयपुर रोडवेज RTI दिव्यांग सुविधाएं विवाद की खबर

Agamy Media

उदयपुर रोडवेज RTI दिव्यांग सुविधाएं पर अगम्य मीडिया की न्यूज़ क्लिपिंग

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